चालीसे का पहला रविवार,,First Sunday of Lent (V),

First Sunday of Lent (V) 21 Feb 2021 : आज चालीसे का पहला रविवार हैं। आज का पहला पाठ उत्पत्ति ग्रन्थ के अध्याय 9:8-15 और दूसरा पाठ को सन्त पेत्रुस का पहला पत्र के अध्याय 3:18-22 से लिया गया हैं। और सुसमाचार को सन्त मारकुस के अनुसार पवित्र सुसमाचार के अध्याय 1:12-15 से लिया गया हैं। तो आईये आज का पवित्र बाईबिल वचन को हम पढते हैं। आप सभी को हमारे Jesus Christ Help ब्लॉग में स्वागत है।

चालीसे का पहला रविवार,,First Sunday of Lent (V),

Sunday Gospel in First Sunday of Lent Season (V),

पहला पाठ : उत्पत्ति ग्रन्थ | अध्याय 9:8-15


8 ईश्वर ने नूह और उसके पुत्रों से यह भी कहा,

9 ”देखो! मैं तुम्हारे और तुम्हारे वंशजों के लिए अपना विधान ठहराता हूँ!

10 और जो प्राणी तुम्हारे चारों ओर विद्यमान है, अर्थात पक्षी, चौपाये और सब जंगली जानवर, जो कुछ जहाज से निकला है और पृथ्वी भर के सब पशु-उन प्राणियों के लिए भी।

11 मैं तुम्हारे लिए यह विधान ठहराता हूँ-कोई भी प्राणी जलप्रलय से फिर नष्ट नहीं होगा और फिर कभी कोई जलप्रलय पृथ्वी को उजाड़ नहीं बनायेगा।”

12 ईश्वर ने यह भी कहा, ”मैं तुम्हारे लिए, तुम्हारे साथ रहने वाले सभी प्राणीयों के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए जो विधान ठहराता हूँ, उसका चिन्ह यह होगा-

13 मैं बादलों के बीच अपना इन्द्र धनुष रख देता हूँ; वह पृथ्वी के लिए ठहराये हुए मेरे विधान का चिन्ह होगा।

14 जब मैं पृथ्वी के ऊपर बादल एकत्र कर लूँगा और बादलों में वह धनुष दिखाई पड़ेगा,

15 तब मैं तुम्हारे लिए और सब प्राणियों के लिए ठहराये अपने विधान को याद करूँगा और फिर कभी जलप्रलय सभी शरीरधारियों का विनाश नहीं करेगा।

Sunday Gospel in First Sunday of Lent Season (V),

दूसरा पाठ : सन्त पेत्रुस का पहला पत्र | अध्याय 3:18-22


18 मसीह भी एक बार पापों के प्रायश्चित के लिए मर गये, धर्मी अधर्मियों के लिए मर गये, जिससे वह हम लोगों को ईश्वर के पास ले जाये, वह शरीर की दृष्टि से तो मारे गये, किन्तु आत्मा द्वारा जिलाये गये।

19 वह इसी रूप में कैदी आत्माओं को मुक्ति का सन्देश सुनाने गये।

20 उन लोगों ने बहुत पहले ईश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया था, जब वह धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कर रहा था और नूह का जहाज़ बन रहा था। उस जहाज में थोड़े ही अर्थात् आठ व्यक्ति जल से बच गये है।

21 यह बपतिस्मा का प्रतीक है, जो अब आपका उद्धार करता है। बपतिस्मा का अर्थ शरीर का मैल धोना नहीं, बल्कि शुद्ध हृदय से अपने को ईश्वर के प्रति समर्पित करना है। यह बपतिस्मा ईसा मसीह के पुनरुत्थान द्वारा हमारा उद्धार करता है।

22 ईसा स्वर्ग गये और स्वर्ग के सभी दूतों को अपने अधीन कर ईश्वर के दाहिने विराजमान हैं।

चालीसे का पहला रविवार,,First Sunday of Lent (V),

सुसमाचार: सन्‍त मारकुस के अनुसार पवित्र सुसमाचार | अध्याय 1:12-15


12 इसके बाद आत्मा ईसा को निर्जन प्रदेश ले चला।

13 वे चालीस दिन वहाँ रहे और शैतान ने उनकी परीक्षा ली। वे बनैले पशुओं के साथ रहते थे और स्वर्गदूत उनकी सेवा-परिचर्या करते थे।

14 योहन के गिरफ़्तार हो जाने के बाद ईसा गलीलिया आये और यह कहते हुए ईश्वर के सुसमाचार का प्रचार करते रहे,

15 ’’समय पूरा हो चुका है। ईश्वर का राज्य निकट आ गया है। पश्चाताप करो और सुसमाचार में विश्वास करो।’’

मनन-चिंतन चालीसे का पहला रविवार,

चालीसा काल एक ऐसा समय जब हम खुद को, खुद के मन व दिल को टटोलकर देखते हैं। यह एक ऐसा समय है जब पूरी कलीसिया एक तरह से आध्यात्मिक साधना करती है। जब हम आध्यात्मिक साधना अथवा रिट्रीट के बारे में सोचते हैं, तो हम जीवन की सामान्य दिनचर्या से दूर एक विशेष स्थान पर जाने की सोचते हैं जहाँ एक अलग दिनचर्या होती है। सुसमाचार में हम पाते हैं कि येसु बस यही कर रहे हैं । वह आत्मा द्वारा निर्जन स्थान में, ले जाये जाते हैं, जहाँ वे भीड़ से दूर अकेले रहकर प्रार्थना करते हैं। वे चालीस दिनों तक वहीं रहे, जो हमारे तपस्याकाल की अवधी है।

जब येसु निर्जन स्थान में गए तो शैतान ने उनकी परीक्षा ली। दूसरे शब्दों में, कहें तो वे उस शक्ति का सामना करने के लिए सामने आये जो सुसमाचार की विरोधी है। येसु ने सुसमाचार को अपने जीवन में बिना संघर्ष के नहीं जीया । हालाँकि, सुसमाचार बताता है कि उस संघर्ष में वे अकेले नहीं थे । पिता ईश्वर उनका साथ दे रहे थे। हम पढ़ते हैं, स्वर्गदूत उनकी देखभाल व परिचर्या के लिए आते हैं। यदि येसु को उस शक्ति का सामना करना पड़ा जो सुसमाचार के विरोध में है, वही उनके अनुयायियों के साथ होना स्वाभाविक है। हमें उतना ही यथार्थवादी होना चाहिए जितना येसु थे। हमारे बाहर और हमारे भीतर गहरी व बड़ी ताकतें हैं जो सुसमाचार के विरुद्ध हैं और जो हमें सुसमाचार से दूर जाने का काम करती हैं। यदि हम इन ताकतों को गंभीरता से नहीं लेंगे, तो हम उन्हें अपने में जमा करते रहेंगे। उन पर काबू पाने के लिए पहला कदम उनका सामना करना है जैसा येसु ने किया।

हम अपने दम पर ऐसा नहीं सकते। हम ईश्वर के साथ उन शक्तियों का सामना करते सकते हैं। इसलिए हम संत पौलुस के साथ कह सकते हैं – जो मुझे बल प्रदान करते हैं, मैं उनकी सहायता से सब कुछ कर सकता हूँ। आमेन।

Thank You ,,,

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