प्रेमस्वरूपी ईश्वर का एक अतिश्रेष्ठ वरदान है. मध्यस्थ-प्रार्थना। बाइबिल में ईश्वर का एक वचन इस प्रकार हैं – मैं तुम्हारे द्वारा एक महान राष्ट्र उत्पन्न करूँगा, तुम्हें आशीर्वाद दूँगा और तुम्हारा नाम इतना महान बनाऊँगा कि वह कल्याण का स्रोत बन जायेगा… तुम्हारे द्वारा पृथ्वी भर के वंश आशीर्वाद प्राप्त करेंगे (उत्पत्ति 12:2-4)।
आज़ साधना-मन्दिरों और बाइबिल समारोहों से होकर जो ईश्वर वचन सुन कर कृपा पाते हैं, उनके प्रति ईश्वर की इच्छा हैं कि वे दुनिया के सभी लोगों के लिए अनुग्रह बन जाये । जब हम दुनिया भर के लिए मध्यस्थ प्रार्थना करते हैं तब हम सबों के लिए अनुग्रह बन जाते हैं।
हमने ईसा को एकमात्र सत्य-ईश्वर, एकमात्र मुक्तिदाता और प्रभु मान कर, विश्वास करके दुनिया भर के लिए मध्यस्थ प्रार्थना की। जब हम इस प्रकार अनुग्रह बनें तो पूर्वजों के ज़रिए अपने परिवार में कोई पाप, टूटन, शाप, रोग या कोई बाधा हो या शैतानी बन्धन हो, इन सबों से ईसा मसीह की क्रूसी मृत्यु की योग्यता से हमारे ज़रिए अनुग्रह के कारण बनाये जायेंगे, आगामी पीढियों को हमारे द्वारा कृपायें मिलती रहेंगी। यह पवित्र-ग्रन्थ का वादा है। वे पुराने खण्डहरों और नष्ट किए हुए स्थानों का पुननिर्माण करेंगे। वे उन नगरों में बस जायेंगे, वे पीढियों से उजाड पडे हैं (ईसा 61:4) उसकी कृपा उसके श्रद्धालू भक्तों पर पीढी-दर-पीढी बनी रहती है (लुकस 1:50) । क्योंकि, ईसा मसीह एकरूप रहते हैं. कल, आज और अनन्त काल तक (इब्रा 13:8) इसलिए असंभव कार्यो को संभव बनाते (लुकस 1:37) ईसा कृपाप्राप्त हमारे ज़रिए बोती हुई. आज की और आने वाली पीढियों में घुस कर अनुग्रह दे पायेंगे।
दुनिया भर के लिए मध्यस्थ प्रार्थना चलाना यह ईसा द्वारा दिये गये सेवा-कर्म और प्रायश्चित्त कर्म हे। इस प्रकार होने से यह ईसा के लिए प्यारा काम है। इसलिए ईसा स्मरण कराते हैं कि यह सुसमाचार-सेवा हे। उन्होने शिष्यों से कहा, फसल तो बहुत है, परन्तु मज़दूर थोडे हैं । इसलिए फसल के स्वामी से विनती करो कि वह अपनी फसल काटने के लिए मज़दूरों को भेजे (मत्ती 9:37-38) ।
जैसे एक टेन्निस बोल दीवार पर फेंके तो वह किस प्रकार लोटता है, वैसे जब हम दूसरों कै लिए मध्यस्थ प्रार्थना करते हैं तो वही अनुग्रह हमारी ओर लौट आता हैं । ईसा ने पढाया कि जो हमारा विरोधकरतें हैं ।या हमारी हँसी उठाते है, उनके लिए हमें प्रार्थना करनी चाहिए। उन्हें क्षमा करनी चाहिए (लूकस 6:27-28) । यह हमें खूब कृपा-वर्षा मिलने के लिए ईसा पढाते हैं। दुश्मनों के नाश से हमें कोई मुनाफा नहीं । उन्हें कृपा मिलती है तो कोई हानि हमें न होती । अत: दुश्मनों और उनके परिवार वालों को कृपा मिलने लायक प्रार्थना करें तो हमारे परिवारों में अनुग्रहों की वर्षा-सी होगी। ईसा ने कहा, जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिए भी नापा जायेगा (लूकस 6:38)।
प्रार्थना ईश्वराराधना है ।

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