God Jesus in the old Testament

god jesus

 
ईश्वरात्मा पुराने विधान में,,,,,,

     रूवा कादोष (हीब्रु) प्नेबुमा हगियोन,(यूनानी) इन शब्दों का अनुवाद हैं, पवित्र आत्मा नामक शब्द ।
ब्रह्माण्ड और मनुष्य में ईश्वर दस्तंदाजी करते हैं, और काम करते हैं,इसके लिए प्रयुक्त चैतन्य या शक्ति होकर पवित्र आत्मा को पुराना विधान परिचय कराता हे । त्रित्व का तीसरा व्यक्ति ईश्वर रूपी पवित्र आत्मा के बारे में सुव्यक्त अध्ययन पुराने विधान में सूचना के रूप में प्राप्त है । पुराना विधान जब कभी पवित्र आत्मा के बारे में बताता है,तब ईश्वर रूपी आत्मा के बारे में सूचना है, नये विधान के प्रकटीकरण का आरंभ (छाया) संहिता भाविकल्याण का वास्तविक रूप नहीं, उसकी छाया मात्र दिखाती है । (इब्रा 10:1). जिसे विश्वासी देख सकते हैं ।
           इब्रानियों को लिखे लेख में पुराने विधान और नये विधान के अध्ययनों के बीच की फरक और ईसा मसीह के द्वारा उदृघाटित प्रकाशना का महत्व प्रकट किया गया है । प्राचीन काल में ईश्वर बारम्बार और विविध रूपों में हमारे पुरखों से नवियों द्वारा बोला था । अब अन्त में वह हम से पुत्र द्वारा बोला है । उसने उस पुत्र के द्वारा समस्त विश्व कीं सृष्टि की और उसी को सबकुछ का उत्तराधिकारी नियुक्त किया हैं  (इबा 1 1-2) ।
      लेखक फिर कहते हैं – वे सभी अपने विश्वास के कारण ईश्वर के कृपापात्र वन गये । फिर भी उन्हें प्रतिज्ञा का फल नहीं प्राप्त हुआ । क्योंकि ईश्वर ने हम को दृष्टि में रख कर एक श्रेष्ठतर योजना बनायी थी । वह चाहता था कि वे हमारे साथ ही पूर्णता तक पहुँचे   (इब्रा 11:39-40)  ।

       ईश्वरात्मा के बारे में पुराना विधान क्या -क्या पढाता हैं?

       1. पृथ्वी ओर मनुष्य के सृष्टिकर्म में ईश्वरात्मा ने खास योरादान दिया था । बाइबिल के प्रथम ग्रन्थ में इसकी सूचना है । पृथ्वी उजाड और सुनसान थी । अथाह गर्त पर अन्ध्रकार छाया हुआ था और ईश्वर का आत्मा सागर पर विचरता था (उत्पत्ति 1:1-2) । योब का ग्रन्थ यह फिर से उदृघोषित करता है: ईश्वर की आत्मा ने मुझे गढा है, सर्वशक्तिमान मुझ में प्राणवायु फूँकता है (योब 33: 4)  ।
    2. स्तुति करने वालों के बीच में रह कर कोई आत्मा को पा सकता है । नबी समूएल ने साऊल से कहा, इसके बाद तुम गिब आत एलोहीम पहुँचोगे, जहा फिलिस्तियों का प्रशासक रहता है । नगर में प्रवेश करते ही तुम को नबियों का दल मिलेगा, जो टीले से नीचे उतर रहा होगा । वे वीणा, डफ,,मुरली और सितार बजाते होंगे । वे आविष्ट होकर भविष्यवाणी कर रहे होंगे । तब तुम भी प्रभु की आत्मा से प्रविष्ट हो कर उनके साथ भविष्यवाणी करोगे । तुम एक दूसरा व्यक्ति बन जाओगे. . . . गिबआ पहुँचने पर वहाँ उसे नब्बिर्यों का दल मिला । उसे ईश्वरीय प्रेरणा प्राप्त हुई और वह उनके साथ आविष्ट हो गया   (1 समू 10: 5-10) । खोये हुए गधों को ढूँढ कर जाते वक्त साऊल को अप्रतीक्षित समय पर ये सब हुए ।
     3. कठिन कार्यों को आत्मा संभव बनाता है ।  न्यायमूर्ति समसोन आत्मा की शक्ति से असाधारण कार्य कर सके । बाइबिल में ऐसा एक वर्णन है । समसोन. अपने मातापिता के साथ तिमना गया । जब वह तिमना की दाखबारिर्यों में था , तब अचानक एक सिंहशावक उस पर गरजता हुआ आ पहुँचा । समसोन को प्रभु कीं प्रेरणा प्राप्त हुई । यद्यपि उसके हाथ में कुछ नहीं  था , उसने उसे ऐसे चीर डाला, जैसे कोई किसी बकरी के बच्चे को चीर देता है  (न्याय 14:5-6) । नबी एजेकियेल ने ईंश्वरात्मा की मदद की बात का वर्णन किया है-आत्मा ने मुझ में प्रवेश कर मुझे पैरों पर खडा कर दिया (एजे 2:2) । आत्मा मुझे उठा कर ऊपर ले गया और ईश्वर के आत्मा की प्रेरणा से दिव्य दृश्य में मुझे निर्वासिर्तों के पास खल्दैया ले गया (एजे 11:24) ।
        4. नेतागिरी के गुण आत्मा द्वारा दिये जाते हैं :     योशुआ को मूसा ने अपने आगामी नेता के रूपमें नियुक्त किया, क्योकि वे आत्मा से संचालित थे (गणना 27:18-22) । आम तौर पर उनमें आत्मा का निवास है, जो ईश्वर के प्रति ईमानदारी प्रकट करते हैं । योशुआ ने अपने जीवन से इस प्रमाणित किया । नून के पुत्र योशुआ और युफुन्ने के पुत्र कालेब ने, जो देश की टोह लेनेवालों में थे, अपने वस्त्र फाट कर इस्राएलियों के सारे समुदाय से कहा, वह देश एक अनुपम देश है, जिसके निरीक्षण के लिए हम गये थे  (गणना 14: 6-7) बाकी सबों ने उस देश के बारे में गलत सन्देश दिया , जिसे वे देखने गये थे ।
5.  निर्गमन कार्यं पवित्र आत्मा द्वारा संपन्न हुआ ।  नहेम्या ने लिखा: तू ने अपनी असीम दया के अनुरूप मरुभूमि में उनका परित्याग नहीं किया, न तो वह बादल का खम्भ उनके सामने से हटा, जो दिन में उम्हें रास्ते दिखाता था और न वह अग्निस्तंभ, जो रात में उनका पथ आलोकित करता था । तू ने उम्हें अपना कल्याणकारी आत्मा प्रदान किया, जिससे उनमें विवेक आ जाये,तू ने उनके मुख में मन्ना देना आस्वीकार नहीं किया, तू ने उन्हें प्यास बुझाने के लिए पानी दिया । तू मरुभूमि में चालीस वर्ष तक उनका भरण पोषण करता रहा । उसे किसी बात की कमी नहीं रही; उनके वस्त्र जर्जर नहीं हुए और उनके पाँव नहीं सूजे (नहेम्या 9:19-21) ।
 जब तुम मिश्र से निकल रहे थे , उस समय मैंने तुमसे जो प्रतिज्ञा की है, मैं उसे पूरा करूँगा । मेरा आत्मा तुम्हारे बीच निवास करेगा । मत डरो (हग्गाय 2 : 5) ।

  6. अभिषिक्तों के अभिषेक के द्वारा आत्मा का प्रदान संभव है , नबी समूएल ने ईश्वर के कहे अनुसार दाऊद को तेल से अभिषिक्त किया (1 समू 16 : 12 -13)  आत्मा को व्यक्तियों पर प्रदान करने का मार्ग उत्तरदायी अधिकारी की अभिषेक शुश्रुषा हे ।
7. इस्राएल के शत्रुओं का सामना आत्मा क्री शक्ति से करते हैं ।  बुराई के विरुद्ध विश्वासियों कें संघर्ष की शक्ति-स्रोत, पवित्र आत्मा है (गणना 4:6) । मिश्री मात्र मनुष्य हें, ईश्वर नहीं , उनके घोडे हाड-मांस के हैं, आत्मा नहीं । जब प्रभु अपना हाथ उठायेगा, तो … सहायक ठोकर खाएगा और सहायता पानेवाला गिर जायेगा,दोनो साथ साथ नष्ट हो जायेंगे (इस 31:3) । ईश्वर की आत्मा साथ है, अत: इस्राएली अन्य जनता से भिन्न है।
8. जिन्हें आत्मा का अभिषेक है, वे ज्ञान प्रकाशना कर सकते हैं । फिराऊन ने अपने दरबारियों से कहा, क्या हमें उस मनुष्य की तरह  कोई ऐसा व्यक्ति  मिल सकता है, जिसमें ईश्वर का आत्मा विद्यमान है ? इसके बाद फिराऊन ने यूसुफ से कहा जब ईश्वर ने तुम्ही पर सबकुछ प्रकट किया है, तो तुम्हारी तरह समझदार और बुद्धिमान कहीं नहीं मिल सकता हैं (उत्पत्ति 41:38-39)  । ईश्वर के आत्मा के अधीन होकर दु:खों और कठिनाइयों में यूसुफ की भाँति दीर्घक्षमा का प्रशिक्षण करने वालों को ईरवर का आत्मा ज्ञान का वचन, जानकारी का वचन, आदि कृपायें देते हैं । यूसुफ अपने अन्तिम समय घोषणा करते हैं कि अपनी शक्ति का स्रोत ईश्वर द्वारा दिया आत्मा है । ये दाऊद के अन्तिम शब्द है,यह यिशय के पुत्र दाऊद की वाणी हैं, अतिप्रतिष्ठित व्यक्ति की, याकूब के ईश्वर के अभिषिक्त की, इस्राएल के मधुर गायक कीं वाणी है (2 समू 23:1-2)| ।
       प्रज्ञा के ग्रन्थ में यह बात प्रकट की गयी हैं- यदि तूने  प्रज्ञा का वरदान दिया होता और अपने पवित्र आत्मा को नहीं भेजा होता, तो तेरी इच्छा कौन जान पाता? (प्रज्ञा 9:17) । इसायाह ने कहा : प्रभु के आत्मा में प्रज्ञा की भरमार है । मनुष्यवर्ग के सारे ज्ञान को मिलाये तो भी उस प्रज्ञा के समान न हो पायेगा (इसा 40:12-13 ) ।
     9. नबियों में आत्मा सुधार की शक्ति हैं, सान्त्वना वचन है ।
      मीकाह के ग्रन्थ में हम पढते हैं-किन्तु मैं , मुझे में मुझे तो अधिकार प्राप्त है, मुझमें ईश्वर का सामर्थ्य, न्याय और बल भरपूर है कि मैं याकूब को उसके पापों से, इस्राएल को उसके पापों से, इस्राएल को उसके अपराधों से आगाह करूँ  (मिका 8:8) ।

   10. गुरू अपने को मिले आत्मा को शिष्यों को दे सकते हैं । 
     एलियाह और एलीशा के बीच गुरु शिष्य संबन्ध होता था । एलियाह ने आत्मा को एलीशा को दिया । वर्णन इस प्रकार है,नदी पार करने के बाद एलियाह ने एलीशा से कहा, मुझे बताओ कि तुमसे अलग किए जाने से पहले मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ? एलीशा ने उत्तर दिया , मुझे आप की शक्ति का दोहरा भागे प्राप्त हो’..  येरीखो के नबियों के शिष्य, जो कुछ दूरी पर खडे रह गये थे, उसे देख कर बोल उठे एलियाह की आत्मिक शक्ति एलीशा को मिल गयी हैं । वे उससे मिलने । आये, उन्होंने उसे दण्डवत् प्रणाम किया (2 राजा 2:9:15)  ।
Jesus christ
  11 . निर्मल हृदय और मुक्ति का आनन्द पवित्रात्मा ही देते हैं,स्तोत्रकार अपने ग्रन्थ में लिखा है,ईश्वर ! मेरा हृदय फिर शुद्ध कर और मेरा मन फिर सुदृढ बना । अपने सान्निध्य से मुझे दूर न कर (स्तोत्र 51:12-13) । मुक्ति का आनन्द मुझे प्रदान कर । उदारता में मेरा मन सुदृढ बना (स्तोत्र 51:14) ।
        12. सबों को ईश्वरात्मा एक समय मिलेगा, इसके बारे में एक भविष्यवाणी पुराने विधान में है । उस समय इस प्रकार होगा: तुम्हारे, पुत्र और पुत्रियों भविष्यवाणी करेंगे। तुम्हारे नवयुवकों को दिव्य दर्शन होंगे, और तुम्हारे बडे बूढे स्वप्न देखेंगे । मैं उन दिनों अपने दास- दासियों पर अपना आत्मा उतारूँगा और वे भविष्यवाणी करेंगे। मैं ऊप आकाश में चमत्कार दिखाऊँगा और नीचे पृथ्वी पर चिहन प्रकट करूँगा, अर्थात् रक्त, अग्नि और उडता हुआ धुआँ (जोएल 3:1-4)  संत पेत्रुस पेंतकोस्त के दिन अपने और अपने दोस्तों को जो अनुभव हुआ, उसका वर्णन योएल के ग्रन्थ का उद्धरण करके दे चुके हैं (प्रे,च 2:17-20) ।  ईश्वर इस्राएली जनता पर अपने आत्मा भेजेंगे,इसायाह ने मविष्यवाणी की ,  याकूब मेरे सेवक ! तुम मत डरो । इस्राएल मैं ने तुम्हें चुना है । मैं प्यासी भूमि पर पानी बरसाऊँगा । मैं सूखी धरती पर नदियों बहाऊँगा मैं तुम्हारे वंशजों को अपना आत्मा और अपनी संतति को अपना आशीर्वाद प्रदान करूँगा (इसा 44 : 2-3) । ऊपर से आत्मा का वरदान मिलेगा और मरुभूमि फल उद्यान बन जायेगी । तब मरुभूमि में न्याय रहेगा । (इसा 32:14-15) ।
      13. जब पाप करते है तब आत्मा व्यक्तियों को छोड जाते हैँ  । प्रभु का आत्मा साऊल को छोडे कर चला । उन्होंने जिस अपदूत को भेजा,उसने उसे सताया  (1 समू 16: 14) । साऊल ने पाप किया, और आत्मा उसे छोड कर चला गया । (जान बूझ कर) जो पाप करते हैं, दुष्टात्मा को उनकी ओर बुलाते हैँ ।
      14. आनेवाले मुक्तिदाता पर आत्मा का वास होगा , आने वाले मुक्तिदाता के बारे में इसायाह की भविष्यवाणी इस प्रकार है , प्रभु का आत्मा मुझ पर छाया रहना है, क्योंकि उसने मेरा अभिषेक किया है । उसने मुझे भेजा है कि  मैं  दरिद्रो को छुटकारे का और कैदियों को मुक्ति का सन्देश सुनाऊँ, प्रभु के अनुग्रह का वर्ष और ईश्वर के प्रतिशोध का दिन घोषित करूँ; विलाप करने वाले को सान्ताना दूँ (इसा 61:1-2) । ईसा ने अपने गाँव नाज़रेथ आये तो यह पवित्र गन्थ भाग  पढकर इस प्रकार कहा: धर्म ग्रन्थ का यह कथनं आज तुम लोगों के सामने पूरा हौ गया हैँ (लूकस 4:21) । इसायाह ने  42 : 1  में भी   उसकी सूचना दी है । यह मेरा सेवक है, मैं इसे संभालता हूँ ।  मैंने इसे चुना हैं, में इस पर अत्यन्त प्रसंन्न हूँ । मैंने इसे अपना आत्मा प्रदान किया है, जिससे यह राष्ट्रों में धार्मिकता का प्रचार करें । यिशय के धड से एक टहनी निकलेगी, उसकी जड से एक अंकुर फूटेगा, प्रभु का आत्मा उस पर छाया रहेगा, प्रज्ञा तथा बुद्धि का आत्मा; सुमति तथा धैर्य का आत्मा, ज्ञान तथा ईश्वर पर श्रद्धा का आत्मा ज्ञान तथा ईश्वर पर श्रद्धा का आत्मा (इसा 11:1-2) ।
पुराना विधान ईंश्वरात्मा के बारे में जो पाठ देता हैं, उसकी पूर्णता नये विधान में हम को मिलती है ।

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