Jesus – मूल्य चुकाने तैयार हैं ?

Jesus - मूल्य चुकाने तैयार हैं ?

मूल्य चुकाने तैयार हैं ? – Jesus

    आप लोग कीमत पर खरीदे गये हैं, अब मनुष्यों के दास न बनें। भाइयो! हर एक व्यक्ति जिस स्थिति में बुलाया गया था, वह उसी में ईश्वर के सामने रहे (1 कुरि.7 23-24) । पिता ईश्वर ने कीमत पर अपने पुत्र को हमारे लिये दे दिया। सन्त पेत्रुस का वचन सुनें: आप लोग जानते हैं कि आप के पूर्वजों से चली आयी, हुई निरर्थक जीवन-चर्चा से आप का उद्धार सोने चान्दी जैसी नश्वर चीजों की कीमत पर नहीं हुआ है बल्कि एक निर्दोष तथा निष्कलंक मेमने अर्थात मसीह के मूल्यवान रक्त की कीमत पर (1 पेत्रु 1: 18-19)। यह अमूल्य रक्त हमारे लिए देते हुए ईसा ने हमें पाप से शुद्ध करके (1 योहन 1: 7) ईश्वर की सन्तानों की हैसियत दे दी। संक्षेप में एक भी  व्यक्ति का नाश न हो जाये, सबों को मुक्ति मिले, इसके लिए अपने पुत्र की बलि चढाने के लिए प्रभु ने दे दिया। क्योंकि खुन बहाये बिना पाप-मुक्ति नहीं (इब्रा 9:22) ।

    इब्रानियों को भेजे लेख में सन्त पौलुस ज्यादा खूबसूरत सुललित ढंग से बातें बताते हैं । ईसा रूपी नित्यपुरोहित ने पहली और आखिरी बलि खुद चढा कर (ईश्वर की इच्छा के अनुसार)पुराने विधान को नवीन बनाया है। आगे पाप-मुक्ति के लिए कोई कबूतर या जानवर की बलि नहीं चढाये । उनकी बलि से नित्यरक्षा, विशुद्धीकरण और परिपूर्णता हमें मिली है। बैलों और बकरियों के खून की पाप हटाने की शक्ति नहीं, इन बलियों से हर साल वे अपने पापों की याद करते है, ईश्वर ने यह देखा (10: 3-4) और पुराने विधान को नवीन बनाया, आनेवाली भलाइयों के मुख्य याजक बन कर (9,11) ईसा को ले आये। अत: आगे पाप के लिए प्रायश्चित्त बलि की ज़रूरत नहीं, क्योंकि उनके रक्त के मूल्य से उन्होंने हमारे लिए नवीन और सजीव पथ खोल दिया है (10:20) ।

      हमें नित्यरक्षा, विशुद्धीकरण और परिपूर्णता ईसा के अपने आपको कीमत पर समर्पण देने के कारण मिल गयी। ईसा ने पिता से जो मुक्ति अपनायी, यह ईश्वर की सभी सन्तानों का हक है। यह मुक्ति मनुष्य सन्तानों तक नहीँ पहुँचे, इसके लिए शत्रु और परीक्षक रूपी शैतान कमर कस कर उतर आया है (1 पेत्रु 5:8)। थोडी देर तक प्रकट होती जुगु की भाँति दुनिया और उसकी मोहक चीज़ों को दिखा कर फँदे में फँसाना शैतान का तन्त्र है। धन, लैंगिकता, सोना, पद मद्य इन्हें आगे दिखा कर शैतान जुआ खोलता है । नश्वर सूख-भोगों के लिए कमज़ोर मनुष्य अनश्वर और कीमती आत्मा को खो देता है। इसके साथ हम पर शैतान का पूरा नियंत्रण होता है और वह उसे अन्धकार की दुनिया में थकेल देता है। ऐसे अन्धकार की दुनिया में थकेल देता है। ऐसे अन्धकार के कर्मों से ले जा कर शत्रु मनुष्य को धराशायी बनाता है। कितने महाराजा, महान, अच्छे व्यक्ति, आध्यात्मिक क्षेत्र में मशाल जैसे चले हुए व्यक्ति उसके जाल में फँस कर सत्नाम और जीवन खोकर टूट गये हैं। अत: ईसा ने मूल्य चुका कर जो मुक्ति दिलायी है, उस अनमोल मुक्ति को अपनायें । इसके लिए त्याग की ज़रूरत है। ईश्वर की इच्छा हमारा मुख्य काम हो, जैसे घर बनाने वाला राजमिस्ती तुला के ज़रिए दीवार को सीधे तैयार करता है, वैसे ईश्वर की इच्छा विश्वासी को हर दिन चलाये। ” ईश्वर! आप की इच्छा निभाना मेरा आनन्द है”। ईश्वर की इच्छा क्या है, वह उनके वचनों से हम जानते हैं।

मूल्य चुकाने तैयार हैं ? – Jesus

   ईसा का दान जैसे दुनिया की रीति है,वैसे हम मूल्य चुका कर नहीं खरीदें। वह मुफ्त दान है । मगर वह दान पाने के लिए हम पहले ईश्वर को जानें फिर ईसा के रास्ते पर चलें। ईश्वर और उनकी सडक को हम पवित्र वचन से समझते हैं। अत: सन्त पेत्रुस ने कहा: “तुम ने दुबारा जन्म लिया है, नश्वर बीज से नहीं, अनश्वर बीज से है । सजीव और शाश्वत ईश्वर-वचन से”। संक्षेप में ईसा के पवित्र अनुसार जीवन बितायें । एक व्यक्ति तभी बचता है।

    गीध जीवन के मध्यकाल में ऊँचे चट्टान की तराई पर जा कर पुराने पंखों और नाखूनों को झडता है जिसके लिए उन्हें लोग लेता है। इस कान के वक्त खून व्यक्त है, उसे दर्द सहना पडता है। आखिर चमडा निकाले गये मुर्गे की भाँति वह बन जाता है। दुबारा जन्म के लिए गीध इस प्रकार करता है । महीनों के बाद उसे नयी पांखें, नये नाखून उगते हैं और फिर बढ जाते हैं। तब वह ऊँचाई की ओर उड सकता है वह पहले अपनी पंखों और नाखुनों को छोड कर नया जन्म पा सकता है। उसे काफ़ी मूल्य चुकाना पडा, तभी दुबारा जन्म मिला। दुबारा जन्म लेने अथवा मुक्ति पाने के लिए गीध ने पांखें छोडी वैसे हम अपने पाप भरे पुराने मनुष्य को छोडें। यदि ऊँचाई पर, सफलता पर नहीं पहुँच पाया तो कारण है पुराने मनुष्य का दुष्कर्म। उन्हें छोड कर प्रभु की शक्ति पर आसरा रखें तो हम में नयी पंखें उगेंगे जो सशक्त होंगी। जब वे पूर्ण होंगी तब सबों को चकित कराते हुए हम ऊपर की ओर उठेंगे। हमारा पुराना जीवन देख कर किसी ने हमारा अपमान किया है तो उसके सामने हम चमत्कार होकर नज़र आयेंगे। अथवा प्रभु ऐसा माहौल तैयार करेंगे। इसा 49:29-31 का वचन उसके लिए लिखित होगा।

     यदि तुम प्रार्थना करोगे तो प्रभु उत्तर देता है, तुम दुहाई दोगे तो ‘देखो । मैं यहाँ हूँ ‘ का जवाब देता है और आदेश देता है कि क्या करना है। इसा 58: 7-8 में इसका पूरा निर्देश तो है: अपनी रोटी भूखों के साथ खाना, बेघर दरिद्रों को अपने यहाँ ठहराना। जो नंगा है, उसे कपडे पहनाना और अपने भाई से मुँह नहीं मोडना। तब तुम्हारी ज्योति उषा की तरह फूट निकलेगी और तुम्हारा घाव शीघ्र ही भर जायेगा। तुम्हारी धार्मिकता तुम्हारे आगे-आगे चलेगी और ईश्वर की महिमा तुम्हारे पीछे-पीछे आती रहेगी।

   प्यारे भाइयों-बहिनों, ज़रा विनम्र होने, क्षमा करने, त्याग करने के लिए हम तैयार नहीं है तो हम ईश्वर से कौन सा न्याय पायेंगे? ईसा ने अपने शरीर और रक्त को पापियों की मुक्ति के लिए बाँट दिये, ईसा का प्रेम कहाँ और हमारा कर्म कहाँ? कितने साधना-भाषण, पवित्र मिस्सा, जपमाला-समर्पण क्रूस के रास्ते? जो शाखाएँ अंगूरी लता के तने से लगे रहती हैं,वे ज्यादा फल निकालती हैं, प्रभु हमें याद कराते हैं। प्यारे भाइयों। हम यह सत्य पहचानें, हमारी और भवन की मुक्ति के लिए मूल्य चुकाने तैयार रहें।

Jesus - मूल्य चुकाने तैयार हैं ?


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.