Jesus is Always with Us

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1 यीशु हमेशा हमारे साथ हैं,,,
1.1 प्रभु पर भरोसा रखने वालों को नयी स्फूर्ति मिलती रहती है । वे गरुड की तरह अपने पंख फैलाते हैं, वे दौडते रहते हैं, किन्तु थकते नहीं,’वे आगे बढते हैं, किन्तु शिथिल नहीं होते (इसा 40;31) । एक बार सन्त मार्टिन लुटेरों के हाथ में पडे। लुटेरों ने उनके पास की सारी चीजें लूट ली फिर उनकी हत्यां करने का’प्रयास किया, किन्तु अचानक भयभीत होकर वे वहाँ से दौड गये । आगे चल कर लोगों ने इस वारदात के बारे में मार्टिन से पूछा तो उन्होंने कहा, जहाँ मनुष्य की मदद मिलना मुश्किल है, वहाँ ईश्वर रक्षा करने दौड आएँगे, मुझे पक्का विश्वास था । जो यह जानता है कि ईश्वर अपने समीपस्थ है जिसे यह धारणा है कि ईश्वर अपने साथ हैँ, वह धन्य हे । वह उस वृक्ष के सदृश है, जो जेलस्रोत के पास लगाया गया, जो समय पर फल देता है, जिसके पत्ते कभी नहीं मुरझाते (स्तोत्र 1:3) । जो यह… जानता है कि ईश्वर अपने’ साथे हे, उसे शंका या भय नहीं । क्योंकि अपनी शरण में आने वालो को हर दुश्मन से वह बचाता है, यह पक्ली धारणा और आस्था उसे है । आप अपनी सारी चिन्ताएँ … उस पर छोड दें, क्योंकि वह आपकी सुधि लेता है (1 पैत्रु 5 : 7) । वह जानता है कि ईश्वर अपर्नी रक्षा-पत्थर, मुक्तिदाता और गढ हे । प्रभु ईश्वर के नाम पर वह अभिमान करता है । इस धारणा में गहरा होकर उनके साथ रहने वालों को वे श्रेष्ठ अनुग्रह देने का वादा दे चुके हैं । वह मेरा भक्त है, इसलिए मैं उसका उद्धार करूँगा ,वह मेरा नाम जानता है, इसलिए मैं उसकी रक्षा करूँगा; यदि वह मैरी दुहाई देगा, तो में उसकी सुनूँगा । मै संकट में उसका साथ ढूँगा, मैं उसका उद्धार कर उसे महिमान्वित करूंगा (स्तोत्र 91 : 14-15)। चालीस साल तक उजाड प्रदेश मे रहे इस्राएलियों ने कोई खेती-बारी न कीं थी, मगर ईश्वर उनके साथ थे, अत: उन्हें भोजन कीं कभी नहीं थी । क्योंकि चमत्कारी ढंग से आकाश से मन्ना और बटेर पक्षी उन्हें मिले (निर्ग 16:13-15) । प्यास बुझाने के लिए सूखे चट्टान से उन्हें पेयजल काफी मिला। चालीस सालों के बीच उनके कपडे पुराने होकर नहीं फाडे और उनके पैरों को दर्द नहीं हुआ । (विधि 8 :4) । मरुस्थल से चलते वक्त धूप में इस्राएली जनता न शिथिल हो जायेँ, इसके लिए ईश्वर ने मेघस्तंभ खडा कर दिये, रात को ठण्ड से बचने के लिए गर्मी ओंर प्रकाश उन्हें चाहिए, इसके लिए अग्निस्तंभ बनाये । इनके साथ ईश्वर सदा चलते रहे (निर्म 13:21) । इस प्रकार अपनी शरण में आने वालों को करुणापूर्वक सुरक्षा प्रदान करनेवाले प्यार का खजाना है, हमारा ईश्वर’ । याद करो, तुम्हें मदद देने के लिए प्रभु आसमान के मेघों के सहारे संचार करते हें (विधि 33 : 26) । जो प्रभु पर आसरा रखते हें, उन्हें वे अन्धकार में रोशनी प्रदान करेंगे । काले-कलूटे जीवन बिताने वालों को वे तारे जैसे हैँ । अत: जिनके साथ ईश्वर है, उन्हें दीप की रोशनी या सूरज का प्रकाश नहीं चाहिए। प्रभु ईश्वर उन पर प्रकाश की वर्षा करते हैं ( प्रका 22 : 5) । बाबूली प्रवास से लौटे आए इस्राएलियों ने देखा कि अपना मन्दिर और चहारदीवारियों तहस -नहस हैं । देश कीं हालत इतनी तंग थी कि-वे एक मन्दिर और चारों ओर की दीवारों बनाने की बात तक सोच नहीं सकते थे । वे हताशनिराश बैठे थे कि ज़कर्या के ज़रिए ईश्वर’ बोले, मैं सियोन लोट रहा हूँ, मैं येरुसालेम में निवास करने आ रहा हुँ। येरुसालेम निष्ठावान नगर और विश्वमण्डल के प्रभु का पर्वत, पवित्र पर्वत कहलाएगा (ज़कर्या 8:3) । हमारे संकटों और कठिनाइयों के बीच हमें जीत दिलाने वाला कोई लेकिक शक्ति या हमारे व्यक्तित्व का वल नहीं, बल्कि ईश्वर का आत्मा हैं । सभी प्रतिकूल माहौलों के ऊपर कर्मरत ईश्वरीय शक्ति पर विश्वास करने और उसे स्वीकार करने में हम समर्थ हो। बाकी सब ईश्वर के साथ में है । क्योंकि ये तुम्हारे आगे बढं-रहे हैं । वे आपके साथ होंगे । वे तुम्हें हताश-निराश या परित्याग न करेंगे, (विधि 31:8) । याद हो कि यदि ईश्वर साथ है तो हम सबकुछ कर सकते हैं ! हमें कोई न परास्त कर सकता। अत: हम निराशा के फलों और दर्दों की कठिनाई से मुँह मोडें । प्रभु मेरी चट्टान, धन्य है! वह मेरे हाथों को युद्ध का और मरी ऊँगलियों को समर का प्रशिक्षण देता है । वह मेरा सहायक है, मेरा शरणस्थान है, मेरा गढ, मेरा मुक्तिदाता और मेरी ढाल (स्तोत्र 144:1-2) । सागर को लहरों में चंचल नाव की भाँति थी, पेत्रुस की आदत । बीच-बीचं में वह चंचल हुईं और उस में पानी_ चढ गया, किन्तु वह नाव नहीं डूबी । वह सागर की गहराई में न धँस गई । पेत्रुस का बल क्या था? रुंलाता सान्निध्य, ख़डा करने वाली शक्ति, मज़बूत बनाता व्यक्ति, व्यक्तित्व का अंग बना प्रेम, चेतना को प्रभावित करता पुरोहित होकर ईसा पेत्रुस के साथ रहे । जैसे पेत्रुस वैसे ईसा से जुडे रहने वालो-से इंसा कहते हैं; नहीं डरो ! मैँने तुम्हारा उद्धर किया है । मैं ने तुमको अपनी प्रजा कॅ रूप में अपनाया है । यदि तुम समुद्र पार करोगे, मैं तुम्हारे साथ होऊँगा। जलधराएँ तुम्हें बहा कर नहीं ले जोयैगी। यदि तुम आग पार करोगे, तो तुम नहीं जलोगे । ज्वालाएँ तुम्हें भस्म नहीं करेंगी । क्योंकि मैं प्रभु, तुम्हारा ईंश्वर हूँ , मैं इस्राएल का परमपावन उद्धारक हुँ ( इसा 43:1-3) । इसलिए ईश्वरीय, शक्ति से पंख फैला कर उडने, आध्यात्मिक ज्ञान का दीप अपनाने, आँधेरे में पैर ठोकऱ खा कर न गिरना’ चाहे, तो ईश्वर से जुडे रहे । वे आपसे जुडे रहे (याकूब 4:8) । हम शस्त्र के बिना युद्ध न कर सकते, वस्त्र पहन कर नदी में तैर नहीं सकते । आध्यात्मिक जीवन में पवित्र जीवन बिता कर नित्यरक्षा पाने के लिए हमें ईसा की मदद की ज़रूरत है । यह सच समझ कर हम ईसा से जुडे रहें । हम उनकी शक्ति पर आसरा रखें । क्योंकि जो प्रमु को खोजते है, उन्हे किसी की कमी नहीँ होगी (स्तोत्र 34:10) ।

यीशु हमेशा हमारे साथ हैं,,,

 

    प्रभु पर भरोसा रखने वालों को नयी स्फूर्ति मिलती रहती है । वे गरुड की तरह अपने पंख फैलाते हैं, वे दौडते रहते हैं, किन्तु थकते नहीं,’वे आगे बढते हैं, किन्तु शिथिल नहीं होते (इसा 40;31) । एक बार सन्त मार्टिन लुटेरों के हाथ में पडे। लुटेरों ने उनके पास की सारी चीजें लूट ली फिर उनकी हत्यां करने का’प्रयास किया, किन्तु अचानक भयभीत होकर वे वहाँ से दौड गये । आगे चल कर लोगों ने इस वारदात के बारे में मार्टिन से पूछा तो उन्होंने कहा, जहाँ मनुष्य की मदद मिलना मुश्किल है, वहाँ ईश्वर रक्षा करने दौड आएँगे, मुझे पक्का विश्वास था ।
        जो यह जानता है कि ईश्वर अपने समीपस्थ है जिसे यह धारणा है कि ईश्वर अपने साथ हैँ, वह धन्य हे । वह उस वृक्ष के सदृश है, जो जेलस्रोत के पास लगाया गया, जो समय पर फल देता है, जिसके पत्ते कभी नहीं मुरझाते (स्तोत्र 1:3) । जो यह… जानता है कि ईश्वर अपने’ साथे हे, उसे शंका या भय नहीं । क्योंकि अपनी शरण में आने वालो को हर दुश्मन से वह बचाता है, यह पक्ली धारणा और आस्था उसे है । आप अपनी सारी चिन्ताएँ … उस पर छोड दें, क्योंकि वह आपकी सुधि लेता है (1 पैत्रु 5 : 7) । वह जानता है कि ईश्वर अपर्नी रक्षा-पत्थर, मुक्तिदाता और गढ हे । प्रभु ईश्वर के नाम पर वह अभिमान करता है । इस धारणा में गहरा होकर उनके साथ रहने वालों को वे श्रेष्ठ अनुग्रह देने का वादा दे चुके हैं । वह मेरा भक्त है, इसलिए मैं उसका उद्धार करूँगा ,वह मेरा नाम जानता है, इसलिए मैं उसकी रक्षा करूँगा; यदि वह मैरी दुहाई देगा, तो में उसकी सुनूँगा । मै संकट में उसका साथ ढूँगा, मैं उसका उद्धार कर उसे महिमान्वित करूंगा  (स्तोत्र 91 : 14-15)।
    चालीस साल तक उजाड प्रदेश मे रहे इस्राएलियों ने कोई खेती-बारी न कीं थी, मगर ईश्वर उनके साथ थे, अत: उन्हें भोजन कीं कभी नहीं थी । क्योंकि चमत्कारी ढंग से आकाश से मन्ना और बटेर पक्षी उन्हें मिले (निर्ग 16:13-15) । प्यास बुझाने के लिए सूखे चट्टान से उन्हें पेयजल काफी मिला। चालीस सालों के बीच उनके कपडे पुराने होकर नहीं फाडे और उनके पैरों को दर्द नहीं हुआ । (विधि 8 :4) । मरुस्थल से चलते वक्त धूप में इस्राएली जनता न शिथिल हो जायेँ, इसके लिए ईश्वर ने मेघस्तंभ खडा कर दिये, रात को ठण्ड से बचने के लिए गर्मी ओंर प्रकाश उन्हें चाहिए, इसके लिए अग्निस्तंभ बनाये । इनके साथ ईश्वर सदा चलते रहे (निर्म 13:21)  ।  इस प्रकार अपनी शरण में आने वालों को करुणापूर्वक सुरक्षा प्रदान करनेवाले प्यार का खजाना है, हमारा ईश्वर’ । याद करो, तुम्हें मदद देने के लिए प्रभु आसमान के मेघों के सहारे संचार करते हें (विधि 33 : 26) । जो प्रभु पर आसरा रखते हें, उन्हें वे अन्धकार में रोशनी प्रदान करेंगे ।  काले-कलूटे जीवन बिताने वालों को वे तारे जैसे हैँ । अत: जिनके साथ ईश्वर है, उन्हें दीप की रोशनी या सूरज का प्रकाश नहीं चाहिए। प्रभु ईश्वर उन पर प्रकाश की वर्षा करते हैं ( प्रका 22 : 5) ।
    बाबूली प्रवास से लौटे आए इस्राएलियों ने देखा कि अपना मन्दिर और चहारदीवारियों तहस -नहस हैं । देश कीं  हालत इतनी तंग थी कि-वे एक मन्दिर और चारों ओर की दीवारों बनाने की बात तक सोच नहीं सकते थे । वे हताशनिराश बैठे थे कि ज़कर्या के ज़रिए ईश्वर’ बोले, मैं सियोन लोट रहा हूँ, मैं येरुसालेम में निवास करने आ रहा हुँ। येरुसालेम निष्ठावान नगर और विश्वमण्डल के प्रभु का पर्वत, पवित्र पर्वत कहलाएगा (ज़कर्या 8:3) ।
     हमारे संकटों और कठिनाइयों के बीच हमें जीत दिलाने वाला कोई लेकिक शक्ति या हमारे व्यक्तित्व का वल नहीं, बल्कि ईश्वर का आत्मा हैं । सभी प्रतिकूल माहौलों के ऊपर कर्मरत ईश्वरीय शक्ति पर विश्वास करने और उसे स्वीकार करने में हम समर्थ हो। बाकी सब ईश्वर के साथ में है । क्योंकि ये तुम्हारे आगे बढं-रहे हैं । वे आपके  साथ होंगे । वे तुम्हें हताश-निराश या परित्याग न करेंगे, (विधि 31:8) । याद हो कि यदि ईश्वर साथ है तो हम सबकुछ कर सकते हैं ! हमें कोई न परास्त कर सकता। अत: हम निराशा के फलों और दर्दों की कठिनाई से मुँह मोडें ।  प्रभु मेरी चट्टान, धन्य है! वह मेरे हाथों को युद्ध का और मरी ऊँगलियों को समर का प्रशिक्षण देता है । वह मेरा सहायक है, मेरा शरणस्थान है, मेरा   गढ, मेरा मुक्तिदाता और मेरी ढाल (स्तोत्र 144:1-2) ।
       सागर को लहरों में चंचल नाव की भाँति थी, पेत्रुस की आदत । बीच-बीचं में वह चंचल हुईं और उस में पानी_ चढ गया, किन्तु वह नाव नहीं डूबी । वह सागर की गहराई में न धँस गई । पेत्रुस का बल क्या था?  रुंलाता सान्निध्य, ख़डा करने वाली शक्ति, मज़बूत बनाता व्यक्ति, व्यक्तित्व का अंग बना प्रेम, चेतना को प्रभावित करता पुरोहित होकर ईसा पेत्रुस के साथ रहे । जैसे पेत्रुस वैसे ईसा से जुडे रहने वालो-से इंसा कहते हैं; नहीं डरो ! मैँने तुम्हारा उद्धर किया है । मैं ने तुमको अपनी प्रजा कॅ रूप में अपनाया है । यदि तुम समुद्र पार करोगे,  मैं तुम्हारे साथ होऊँगा। जलधराएँ तुम्हें बहा कर नहीं ले जोयैगी। यदि तुम आग पार करोगे, तो तुम नहीं जलोगे । ज्वालाएँ तुम्हें भस्म नहीं करेंगी । क्योंकि मैं प्रभु, तुम्हारा ईंश्वर हूँ , मैं इस्राएल का परमपावन उद्धारक हुँ ( इसा 43:1-3) ।
    इसलिए ईश्वरीय, शक्ति से पंख फैला कर उडने, आध्यात्मिक ज्ञान का दीप अपनाने, आँधेरे में पैर ठोकऱ खा कर न गिरना’ चाहे, तो ईश्वर से जुडे रहे । वे आपसे जुडे रहे (याकूब 4:8) । हम शस्त्र के बिना युद्ध न कर सकते, वस्त्र पहन कर नदी में तैर नहीं सकते । आध्यात्मिक जीवन में पवित्र जीवन बिता कर नित्यरक्षा पाने के लिए हमें ईसा की मदद की ज़रूरत है । यह सच समझ कर हम ईसा से जुडे रहें । हम उनकी शक्ति पर आसरा रखें । क्योंकि जो प्रमु को खोजते है, उन्हे किसी की कमी नहीँ होगी (स्तोत्र 34:10) ।

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