Sunday Gospel 30 August 2020.

Sunday Gospel 30 August 2020, 22th Sunday in Ordinary Time.

वर्ष का  22 वाँ सामान्य रविवार

पहला पाठ : नबी यिरेमियाह का ग्रंथ                                                         अध्याय: 20:7-9
दूसरा पाठ :  रोमियो के नाम संत पौलुस का पत्र                                       अध्याय :12:1-2
सुसमाचार : सन्त मत्ती के अनुसार पवित्र सुसमाचार                                अध्याय :16:21-27
Sunday Gospel 30 August 2020, 22th Sunday in Ordinary Time.
  पहला पाठ 
                नबी यिरेमियाह का ग्रंथ                                                         अध्याय: 20:7-9


     प्रभु ! तूने मुझे राजी किया और मैं मान गया तूने मुझे मात कर दिया और मैं हार गया मैं दिन भर हंसी का पात्र बना रहता हूँ सब के सब मेरा उपवास करते हैं

जब जब मैं बोलता हूँ, तो मुझे चिल्लाना और हिंसा तथा विध्वंस की घोषणा करनी पड़ती है

ईश्वर का वचन मेरे लिए निरंतर अपमान तथा उपवास का कारण बन गया है

जब मैं सोचता हूँ,”मैं उसे भुलाऊंगा, मैं फिर कभी उसके नाम पर भविष्यवाणी नहीं करूँगा” ,

तो उसका वचन मेरे अंदर एक धधकती आग जैसा बन जाता है ,जो मेरी हड्डी हड्डी में समा जाती है मैं उसे दबाते दबाते थक जाता हूँ और अब मुझे से नहीं रहा जाता


दूसरा पाठ
                 रोमियो के नाम संत पौलुस का पत्र                                     अध्याय :12:1-2

   अत: भाइयों! मैं ईश्वर की दया के नाम पर अनुरोध करता हूँ कि आप मन तथा ह्रदय से उसकी उपासना करे और एक जीवन्त, पवित्र तथा सुग्राह्य बलि के रूप में अपने को ईश्वर के प्रति अर्पित करें आप इस संसार की अनुकूल बने, बल्कि सब कुछ नई दृष्टि से देखें और अपना स्वभाव बदल ले इस प्रकार आप जान जायेगे कि ईश्वर क्या चाहता है  और उसकी दृष्टि में क्या भला सुग्राह्य तथा सर्वोत्तम है

Sunday Gospel 30 August 2020, 22th Sunday in Ordinary Time.


सुसमाचार :
               सन्त मत्ती के अनुसार पवित्र सुसमाचार                                अध्याय :16:21-27

यदि कोई मेरा अनुसरण करना चाहे,तो वह आत्मत्याग करें।”


           उस समय से ईसा अपने शिष्यों को यह समझाने लगे कि मुझे येरूसालेम जाना होगा ; नेताओं, महायाजकों और शास्त्रियों की ओर से बहुत दु: उठाना, मार डाला जाना और तीसरे दिन जी उठना होगा।

       पेत्रुस ईसा को अलग ले गया और उन्हें यह कहते हुए फटकारने लगा, “ईश्वर ऐसा करे। प्रभु! यह आप पर कभी नहीं बीतेगी।इस पर ईसा ने मुड करपेत्रुस से कहा, “हट जाओ, शैतान ! तुम मेरे रास्ते में बाधा बन रहे हो। तुम ईश्वर की बातें नहीं, बल्कि मनुष्यों की बातें सोचते हो

     इसके बाद ईसा ने अपने शिष्यों से कहा, “जो मेरा अनुसरण करना चाहता है, वह आत्मत्याग करे और अपना क्रूस उठा का मेरे पीछे हो ले; क्योकि जो अपना जीवन सुरक्षित रखना चाहता है, वह उसे खो देगा और जो मेरे कारण अपना जीवन खो देता है, वह उसे सुरक्षित रखेगा।

     मनुष्य को इस से क्या लाभ यदि वह सारा संसार प्राप्त कर ले, लेकिन अपना जीवन ही गँवा दे? अपने जीवन के बदले मनुष्य दे ही क्या सकता है? क्योकि मानव पुत्र अपनी स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा सहित आयेगा और वह प्रत्येक मनुष्य को उसके कर्म का फल देगा।

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